Saturday, 23 July 2016

२८० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

साकी मेरी मधुशाला में तेरे पैमाने में करार दिल को आता है
तेरी सागरमय मादक हाला पीके परदेशी खुद को भुलाता है
जमाने की रुसवाइयों से परे जन्नत का शुकुन परदेशी पाता है
अमृतसम सागरमय हाला पीके झूमता है मचलता है गाता है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव