Saturday, 23 July 2016

२७९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 परदेशी जो मधुशाला में आता है सूरते साकी का दीदार कर होश गंवाता है
 कमसिन अल्हड जन्नते हूर के दीदार से झूमने लगता है बल खाता है
फिर होश उसे नहीं रहता मधुशाला की महफ़िल में जमाने को भुलाता है
कृतक अंजान मनोहर का शागीर्द बनकर मेरी मधुशाला में धुनि रमाता है


No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव