Saturday, 23 July 2016

२७८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 मेरी मधुशाला की हाला पीने वाला झूमता है बहक जाता है
अपने होशो हवास गवांकर परदेशी जन्नत में गोते लगाता है
कभी सागरमय जाम उठाता है कभी जाम छलक जाता है
साकी बाला की अमृतसम हाला की खुमारी में शहंशाह बन जाता है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव