जन्नते हूर साकी बाला मेरी मधुशाला से मोहब्बत की मैंने
कृतक अंजान डगर मनोहर की हिदायत से बगावत की मैंने
मेरी मधुशाला की साकी बाला की हाला ने हिला रखी दुनियाँ
हरेक गमज़दा मेरी मधुशाला में आके चैनों अमन पाता है
कृतक अंजान डगर मनोहर की हिदायत से बगावत की मैंने
मेरी मधुशाला की साकी बाला की हाला ने हिला रखी दुनियाँ
हरेक गमज़दा मेरी मधुशाला में आके चैनों अमन पाता है
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