Saturday, 23 July 2016

२७६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 जो भी कोई आता है मेरी मधुशाला पीके बहक जाता है हाला
बाला की अमृतसम हाला का खुमार दुनियादारी उसे भूलाता है
जब नज़र साकी बाला की उसपर पड़ती है संभलने लग जाता है
मेरी मधुशाला की सागरमय हाला पीके रग रग ने खुमार छाता है 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव