जो भी कोई आता है मेरी मधुशाला पीके बहक जाता है हाला
बाला की अमृतसम हाला का खुमार दुनियादारी उसे भूलाता है
जब नज़र साकी बाला की उसपर पड़ती है संभलने लग जाता है
मेरी मधुशाला की सागरमय हाला पीके रग रग ने खुमार छाता है
बाला की अमृतसम हाला का खुमार दुनियादारी उसे भूलाता है
जब नज़र साकी बाला की उसपर पड़ती है संभलने लग जाता है
मेरी मधुशाला की सागरमय हाला पीके रग रग ने खुमार छाता है
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