हालातों के ज़ख़्मो के अहसास से मुक्ति दिलाती मेरी मधुशाला
बे रहम वक्त के मारो को पीढ़ा से छुटकारा दिलाती मादक हाला
रूपसी सुरबाला के नूर से रौशन मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान की दिली ख्वाहिश जिन्दगी की तमन्ना मादक हाला
बे रहम वक्त के मारो को पीढ़ा से छुटकारा दिलाती मादक हाला
रूपसी सुरबाला के नूर से रौशन मेरी अपनी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान की दिली ख्वाहिश जिन्दगी की तमन्ना मादक हाला
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