आज बाला की सागरमय हाला में आई सुनामी सीना तान
परदेशी और रूपसी बाला दोनों समझदार है नहीं अंजान
सागरमय की सुनामी को हँसते हँसते पी जाने की दिल में ठान
परदेशी द्वारे मेरी मधुशाला के बैठा और कर रहा मय पान
परदेशी और रूपसी बाला दोनों समझदार है नहीं अंजान
सागरमय की सुनामी को हँसते हँसते पी जाने की दिल में ठान
परदेशी द्वारे मेरी मधुशाला के बैठा और कर रहा मय पान
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