Wednesday, 17 August 2016

३४६ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

आज बाला की सागरमय हाला में आई सुनामी सीना तान
परदेशी और रूपसी बाला दोनों समझदार है नहीं अंजान
सागरमय की सुनामी को हँसते हँसते पी जाने की दिल में ठान
परदेशी द्वारे मेरी मधुशाला के बैठा और कर रहा मय पान

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव