पूनम की शबनमी रात में अंजान भ्रमर ने
जवाँ कुमुदनी के लबो से मय पान किया
सारा ज़माना जाग गया जब कुमुदनी के
नूर से मछली कायनात और जवाँ हुई फ़िज़ा
मनचले परदेशी ने दमकते रुखसार को चूमा
झूम उठा बसंत और बहकाने लगी पुरवैया
कृतक के दिल के तार झनझना उठे यारों
बाहों में भरके भ्रमर ने कुमुदनी को चूम लिया
जवाँ कुमुदनी के लबो से मय पान किया
सारा ज़माना जाग गया जब कुमुदनी के
नूर से मछली कायनात और जवाँ हुई फ़िज़ा
मनचले परदेशी ने दमकते रुखसार को चूमा
झूम उठा बसंत और बहकाने लगी पुरवैया
कृतक के दिल के तार झनझना उठे यारों
बाहों में भरके भ्रमर ने कुमुदनी को चूम लिया
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