चाहकर भी तुम्हें भूलने न पाउँगा
मेरी महबूब तेरे दर पे सर झुकाऊँगा
तुही मोहब्बत है आखिरी आरजुएं दिल तुही
तेरी मोहब्बत के लिए जिंदगी दाँव पे लगाउँगा
सागरमे मादक हाला है चाहत मेरी
बिन अमृतसम हाला के मई जीने नहीं पाऊँगा
दिल में बसी है मोहब्बत तुम्हारी
हर हाल में कृतक मालिकाये दिल तुम्हें बनाउँगा
मेरी महबूब तेरे दर पे सर झुकाऊँगा
तुही मोहब्बत है आखिरी आरजुएं दिल तुही
तेरी मोहब्बत के लिए जिंदगी दाँव पे लगाउँगा
सागरमे मादक हाला है चाहत मेरी
बिन अमृतसम हाला के मई जीने नहीं पाऊँगा
दिल में बसी है मोहब्बत तुम्हारी
हर हाल में कृतक मालिकाये दिल तुम्हें बनाउँगा
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