Wednesday, 17 August 2016

३४८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

चाहकर भी तुम्हें भूलने न पाउँगा
मेरी महबूब तेरे दर पे सर झुकाऊँगा
तुही मोहब्बत है आखिरी आरजुएं दिल तुही
तेरी मोहब्बत के लिए जिंदगी दाँव पे लगाउँगा
सागरमे मादक हाला है चाहत मेरी
बिन अमृतसम हाला के मई जीने नहीं पाऊँगा
दिल में बसी है मोहब्बत तुम्हारी
हर हाल में कृतक मालिकाये दिल तुम्हें बनाउँगा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव