Wednesday, 17 August 2016

३४९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

रूपसी हमें भुलाने का हक़ है तुमको
हमारी बात और है दिल में बसाया है तुम्हें
दिली जज़बात जवाँ  होते है लबो को छूके
कोहराम मचाती है हाला उदर में जाके
पसीने से तरबतर होता है गिरेबा सावन में
सावन की फुहारे आग  लगाती है साइन में
तन मन बहकाने लगता है मेरे यार
जब मेरी गालियों  से गुज़रते कनखियों से होता दीदार  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव