रूपसी हमें भुलाने का हक़ है तुमको
हमारी बात और है दिल में बसाया है तुम्हें
दिली जज़बात जवाँ होते है लबो को छूके
कोहराम मचाती है हाला उदर में जाके
पसीने से तरबतर होता है गिरेबा सावन में
सावन की फुहारे आग लगाती है साइन में
तन मन बहकाने लगता है मेरे यार
जब मेरी गालियों से गुज़रते कनखियों से होता दीदार
हमारी बात और है दिल में बसाया है तुम्हें
दिली जज़बात जवाँ होते है लबो को छूके
कोहराम मचाती है हाला उदर में जाके
पसीने से तरबतर होता है गिरेबा सावन में
सावन की फुहारे आग लगाती है साइन में
तन मन बहकाने लगता है मेरे यार
जब मेरी गालियों से गुज़रते कनखियों से होता दीदार
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