Wednesday, 17 August 2016

३५० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

दिल मचलता है ज़माने के फसानो से
करार दिल को आता है सनम तेरे मयखाने में
झूमता गाता दिल चैनोकरार पाता  है
जब अनजान डगर से चलके तेरे मयखाने में आता है
पैमाने में मचलते मय का दीदार जब होता है
जन्नत का सा शुकू कृतक यार पाता है
सजती है महफ़िल रोज़ मेरी मधुशाला में
थिरकती है रूपसी और मचलती है हाला पैमाने में 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव