Saturday, 27 August 2016

अँगडाई

बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी
नंदिनी ये काव्य पंक्तियाँ तुम्हारी
वो लडखडाते कदम
वो धुंधलाते शाये
कोहराम मचाता हुआ कोहरा
ठंड की ठिठुरन में
गरम चाये की चुस्किया
ताजे पेपर की हेड लाइन्स
वो काँगडी से उठता धुँआ
केशर की महक से
महकती फिजा
वो महकती शबनमी मोतियों की महक
वो लरजते दिली अरमाँ
मेरी महबूब ने
ली हो अँगडाई जैसे

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव