बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी
नंदिनी ये काव्य पंक्तियाँ तुम्हारी
वो लडखडाते कदम
वो धुंधलाते शाये
कोहराम मचाता हुआ कोहरा
ठंड की ठिठुरन में
गरम चाये की चुस्किया
ताजे पेपर की हेड लाइन्स
वो काँगडी से उठता धुँआ
केशर की महक से
महकती फिजा
वो महकती शबनमी मोतियों की महक
वो लरजते दिली अरमाँ
मेरी महबूब ने
ली हो अँगडाई जैसे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 27 August 2016
अँगडाई
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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