Friday, 2 September 2016

बाबुल

बाबुल की मोहब्बत को कभी भुला न पाउँगी
कभी न दूर अपने बाबुल जाउँगी
अपने बाबुल का सहारा मै बनूँगी
बाबुल की याद में अश्क मै बहाउँगी
थाम कर उँगली मेरे बाबुल ने चलना मुझे सिखाया
अपने हाथों से कोर खिलाकर बडा मुझे बनाया
अपने कलेजे से जीना मुझे सिखाया
जमाने की मचलती फिजा के दर्मिया राह दिखाई
मेरे अश्कों सहेज के दिल मे बसाया
बाबुल का कर्ज मैं कभी चुका न पाउँगी
जब कभी याद बाबुल की आयेगीं अश्क कभी न बहाउँगी

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव