Saturday, 20 August 2016

आईना ए दिल

बुराईयों का आईना
अपना दिल यार होता है
पर कहा कोई
ये सब मानने को तैयार होता है

अपनी अपनी औकात से
वाकिफ हरेक मेरे यार होता है
अपना दिल स्वयं
हरेक हद से गुजरने को तैयार होता है

स्वयं के बोझ तले
दब गई जिन्दगी
एहसास होता है
हर कोई जानता है

बहुत वक्त है पास मेरे यार
दिल से एतबार तू कर
मोहब्बत की इनायत है
एतबार तू कर

पल पल हरेक पल
मोहब्बत का इझहार करता हूँ
सिर्फ तुम ही हो मोहब्बत हमारी
दिल से स्वीकार करता हूँ

आरजुये दिल है
दिल की अमानत है
जिन्दगी है तू
तमन्नाये जिन्दगी भी

बहुत खुबसूरत और लाजवाब लिखती है आप

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव