Saturday, 20 August 2016

उपवन

यही दिली आरजू हमारी
सींचू तेरे उपवन की क्यारी
मेरे महबूब तूही है मोहब्बत हमारी
तेरे नूर से रौशन है दुनियाँ हमारी
जिन्दगी से भी खुबसूरत और प्यारी
दिली उपवन की सबसे हँसीं कुमुदनी
तेरी मोहब्बत तेरी मुस्कुराहट लगती है प्यारी
तेरी यारी सबब ए जिन्दगी प्यारी
तूही तो है पहली मोहब्बत आखिरी ख्वाहिश हमारी

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव