Saturday, 3 September 2016

चाँदनी

चँदा की चाँदनी कहूँ
या शबनमी मोतियों का बसेरा
केशर की महकती हूर
चाँदनी का तेरे दर पे है डेरा
तेरे नूरों रूखसार से ही तो
रौशन है मेरा हरेक सबेरा
मेरे दिल के उपवन में
ए जन्नते हूर तेरा ही बसेरा
तेरे घनेरे गेसुओं के झुरमुट में
कडकती दमकती बिजुरिया का बसेरा
मेरी पलकों के आशियाने में
ए हूर सिर्फ तेरा ही बसेरा
तेरे पलकों के खुलने से होता कायनात में सबेरा
तेरे पलक मुँदने से होता शबनमी निशा का डेरा
तेरे गजरों में महकती शेफाली मादक मेरे सनम
तेरी रूह की महकती से महकती कायनातो फिजा

बहुत खुबसूरत और बहुत प्यारी नंदिनी जी तस्वीर तुम्हारी

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव