Saturday, 3 September 2016

३५६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

शबनमी मोतियों से तेरे दरों  दिवार सजाऊंगा
अम्बर के चाँद सितारों से तेरा गजरा बनाऊँगा
तेरे रुखसार के नूर से रौशन ये कायनात होगी
तुझे पाने के लिये हरेक जनम मेरी मधुशाला में आऊंगा

तेरे जिस्म की महक सदियो से बसी यार तन में हमारे
मेरे दिल की हरेक धड़कन मेरे सनम हरेक पल तुझको ही पुकारे
तेरी शबनमी अंगूरी यौवन हाला मेरा जीने का सहारा
जीते जी कृतक मर जाऊँगा गर तूने सोचा करने को किनारा

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव