शबनमी मोतियों से तेरे दरों दिवार सजाऊंगा
अम्बर के चाँद सितारों से तेरा गजरा बनाऊँगा
तेरे रुखसार के नूर से रौशन ये कायनात होगी
तुझे पाने के लिये हरेक जनम मेरी मधुशाला में आऊंगा
तेरे जिस्म की महक सदियो से बसी यार तन में हमारे
मेरे दिल की हरेक धड़कन मेरे सनम हरेक पल तुझको ही पुकारे
तेरी शबनमी अंगूरी यौवन हाला मेरा जीने का सहारा
जीते जी कृतक मर जाऊँगा गर तूने सोचा करने को किनारा
अम्बर के चाँद सितारों से तेरा गजरा बनाऊँगा
तेरे रुखसार के नूर से रौशन ये कायनात होगी
तुझे पाने के लिये हरेक जनम मेरी मधुशाला में आऊंगा
तेरे जिस्म की महक सदियो से बसी यार तन में हमारे
मेरे दिल की हरेक धड़कन मेरे सनम हरेक पल तुझको ही पुकारे
तेरी शबनमी अंगूरी यौवन हाला मेरा जीने का सहारा
जीते जी कृतक मर जाऊँगा गर तूने सोचा करने को किनारा
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