Saturday, 3 September 2016

३५५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

भला कुछ तो बात है मेरे महबूबे मोहब्बत में मेरे यारों
दीवाना कृतक अंजान हुआ पीकर उसकी शबनमी हाला 
सारे जमाने के रिश्तो  भुलाकर रूपसी को दिल में बसाया
मेरी मधुशाला को जहन  में बसाकर सबको मेरे यार भुलाया  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव