Saturday, 3 September 2016

३५४ मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 मेरे दिल के उपवन को मेरे महबूब ने समझके मेरी मधुशाला
कलियों को शबनमी हाला और फूलों को पैमाना बना डाला
कृतक अंजान तो दीवाना इ रूपसी सुरबाला सदियों से है यार
मेरे महबूब के मादक गेसुओं ने दीवाना हमें अपना बना डाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव