Saturday, 10 September 2016

जिंदगी से मुलाक़ात हो गई

बीती शब  तनहाइयो में
जिंदगी से मुलाक़ात हो गई
खामोश लब थे खामोश थी ज़ुबा
दिल ही दिल में जिंदगी से
दिली मुलाक़ात हो गई
दिल के हरेक कमरे से गुज़री जिंदगी
खामोश तनहाइयों  में जिंदगी  से
दिल में जो थी वही बात हो गई
बाहो में समां गई मरमरी  जिंदगी
साँसों से सांसे  टकराई और
जवा दिल की धड़कने टकराई और
मोहब्बत की सुनामी में हरेक दीवार  ढह गई
कसमसाती रही बाहों  में जिंदगी
शबनमी मोतियों की चादर बेज़ुबाँ रह गई
बादलों  की ओट से मुसकाई  चाँदनी देख
जिंदगी हया के मारे सहम कर रह गई
बासंती हवाओं  के थपेड़ो में
बाहों  में सिमटकर सब कुछ कह गई
दिल के शामियाने से जब गुज़री जिंदगी
भुली  बिसरी यादों की शमा प्रज्वलित रह गई
पीली सरसों के परागों से खेलती शबनमी बयार
 भूलकर सब कुछ साथ अपने ले गई
चूमकर कपोल सरसों  के महक साथ अपने ले गई
कुछ पल ठहरी पलकों  के शामियाने में
जिंदगी महबूबे रुखसार चूमके रह गई


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव