Sunday, 11 September 2016

तुम कौन हो ?

तुम कौन हो ?
सफेदपोष
काला बाज़ारी के उस्ताज़
स्मगलर चोर उचक्के
या डकैत
तुम्हारी परछाई से भी
ख़ौफ़ज़दा
मैं  हूँ  और ज़माना
कमरे में अँधेरे से भी
खौफ खा जाता हूँ  मैं
नंगा नाचता नज़र आता है तू
सफेदपोष
तेरे शरीर के उतार चढाव
से भली भांति वाकिफ हूँ
मैं  और वाकिफ है सारा ज़माना
उष्ण हवाओ में
तेरी महक का अहसास होता है
फ़िज़ा  चारों  और ख़ौफ़ है तेरा
सभी की आँखों में तेरा डर
साफ़ साफ़ दिखाई देता है
मैं  जब आइना देखता हूँ
मैं स्वयं को पहचान नहीं पाता
मैं  कौन
नहीं जानता मैं
अपने अस्तित्व को भुला बैठा हूँ  मैं








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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव