Sunday, 11 September 2016

ज़माने की भीड़ में खो गई है मोहब्बत हमारी

ज़माने की भीड़ में खो गई है मोहब्बत हमारी
लम्हा लम्हा हरेक पल तलाश ज़ारी है मेरे यार

खोई हुई मोहब्बत की खोज जारी है
वो कल भी हमारी थी आज भी हमारी है

ये लाचारी है मेरी वो करीब नहीं मेरे
मेरे नसीब में है वो दिल के करीब है जो

उसके गम में दुखी है दिल मेरा मेरे यार
और उसके गम में दुःखी  कायनात सारी है

अपना समझकर दिल में बसाया जिसको
एक ठोकर से तोड़ दी उसने उम्मीद हमारी है

 ये सराय है अपना घर समझने की भूल मत कारियो
सभी को है लौटना आज तुम्हारी कल हमारी बारी है

यु तो ज़माने में ज़माने सभी मरते है मौत आने पे यारों
लेकिन जीते जी जमाने में मरना हमारी लाचारी है

गैरो को बसाया दिल में हमने
यही तो होशियारी हमारी है उनके कंधे हमारी लाचारी है




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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव