रब की अजीमों करीम नेमत है जिन्दगी
जिसे अपनी जिन्दगी से मोहब्बत नही
उसें दुसरों से मोहब्बत है कहने में
आखिर क्यों हिचक नही होती मेरे यार
आखिर कब तक खुद को धोखा देती रहोगी तुम
और मोहब्बत है लेकिन अपनी जिन्दगी से नही प्यार
आखिर कब तक ये कहती रहोगी तुम
जिसे अपनी जिन्दगी से मोहब्बत नही
वह किस बिना पे मुझसे प्यार है कहती है
बिन तेरे जिन्दगी अधुरी है कहती है
बहुत मुश्किल है त्रिया चरित्र समझना मेरे यार
रब ही जाने क्या चीज है मोहब्बत क्या प्यार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 12 September 2016
जिन्दगी से मोहब्बत
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