Tuesday, 13 September 2016

बे- खौफ बाहों में मचलती थी अल्हड जबानी

मेरी किताब में रखा वह गुलाब का फूल
कैसे जाऊ मैं  भूल मोहब्बत की निशानी
जिसकी महक से महकती थी कायनात
बे- खौफ बाहों में मचलती थी अल्हड जबानी

याद है मुझे जब तेरे तेरी जुल्फों को गज़रे से सजाया था मैंने
काले घनियारे मेघों में मचलती बिजुरिया ने झुलसाया था
न थी किसी की मज़ाल कोई शांय या हवा छू ले तेरा दामन
अंजान  भ्रमरों की क्या मज़ाल कोई आये मेरे महबूब तेरी डगर

मेरे दिल में बसी है तस्वीर तुम्हारी
जो हरेक पल तेरा अहसास कराती है
मेरे दिल की हरेक धड़कन में हुस्ने यार
तेरी मोहब्बत तेरा प्यार मेरा एतबार

दिल के आसमान में इंद्रधनुष की मानिंद है छाई
अपनी ख्वाबगाह तेरी मोहब्बत भरी यादो से सजाई
बरसों  पहले किताब में सजोई  थी जो मोहब्बत भरी यादे
हमें आज तलाक याद हैं तूने किये थे बे- खौफ वादे 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव