आजाद है परिंदा
सारा अम्बर है परिंदे की परवाज के लिये
ता उमृ जारी रहेगीं परवाज उसकी
मंजिल भी पाता है लौटके आता है नीड अपने
दुनियाँ नई बसाता है मोहब्बत लुटाता है
जहाँ को मुठ्ठी में रख उड जाता है वो
मेहनत से जहाँ है
मेहनत से जमीं और आसमाँ है
उमंग है हौसला है
संवक्छद परवाज हेतु नीला आसमाँ है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 15 September 2016
परवाज ए परिंदा
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खामोशियो की सागिर्दगी
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