Thursday, 15 September 2016

प्रभात की पावन बेल में, इजहारे मोहब्बत, नशीली टाँगे , मेरी ओर


प्रभात की पावन बेल में
इजहारे मोहब्बत
नशीली टाँगे
मेरी ओर

मोहब्बत में रातों की नींद
और दिन का चैन खोया
सारी सारी रात करवट बदलना
तकिये को बाँहो  में भरकर

घने गेसुओं में उंगली घुमाना
पूनम की चाँदनी में
शबनमी मोतियों की शैया
और दमकते रुखसार पे मोहब्बत की निशानी

मोहब्बत की मादक मुझे
वो शाहिल की बाँहो  में सिमटना
तड़पकर शाहिल के जिस्म  समाना
वो मोहब्बत की सुनामी शाहिल का प्यार

मरमरी जिस्म पे हथेली घुमाना
महबूब  का मचलकर बाँहो  में समाना
मोहब्बत की मादक महक के नशे में
फिज़ाओ  मचलकर नशे में झूमना

प्रभात की पावन बेल में
कुमुदनी की नशीली आँखों का खुलना
अंगड़ाई लेकर परदेशी भ्रमर का उठाना
वो निशा का मादक नशा कुमुदनी की नर्मो  नाज़ुक बांहे

प्रभात बेला में कोहीनूर सा
दमकता रुखशारे मेरे महबूब
भ्रमर का कुमुदनी के लबो को चूमना
अंगड़ाई लेकर यौवन का मचलना




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