एक जंग है जिन्दगी
जिये जा रहा हूँ मै
हलाहल मोहब्बत का
हर्षित हो पिये जा रबा हूँ मै
कच्चे धागे से बँधे
मजबूत सामाजिक बंधन
निभा रहा हूँ मै
अंजान डगर पे चलके
मंजिल भी पा रहा हूँ मै
जलजले आये चाहे सुनामी
पथ पे बढता जा रहा हूँ मै
मोहब्बत की डगर काँटों भरी है
महबूबे मोहब्बत की महक पा रहा हूँ मै
अपनों के दिये घावों को
मोहब्बत में भुला रहा हूँ मै
पोषित उन घावों से होके
जिन्दगी जिये जा रहा हूँ मै
बिते हुये स्वर्णिम पलों को याद करने
अपना आज खुद महकता बना रहा हूँ मै
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