Monday, 19 September 2016

दिली मुराद

अम्बर से टूटते हुयें तारों को देखके गर हरेक मुराद पूरी होतीं
रब दी सौ मेरी मोहब्बत मेरी महबूब आज हमारी होतीं

अम्बर से टूटते हुयें तारों को देख यही फरियाद करता हूँ
तुम हमें कभी न भुलाओं मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव