Monday, 19 September 2016

क्वार की मदभरी चाँदनी रात

क्वार के पूनम की शबनमी रात
छिटकती चाँदनी में
मादक शबनमी मोतियों की सौगात
अम्बर में चाँद आया
लेके असंख्य तारों की बारात
मुस्कुराई चाँदनी देख अम्बर में चँद
खिली खिली सी चाँदनी
ज्यों वसुन्धरा ने ओढी
चाँद तारों से सजी से सजी चुनरियाँ आज
चँदा से सतत हो रही शबनमी मोतियों की बरसात
चकवा चकवी के वियोग की
एक और दु:ख भरी रात
महबूबे मोहब्बत का रंगीन साथ
रूखसार के नूर से फबती वसुन्धरा
और पारिजात ने महकाई वसुन्धरा
क्वार के घनेरे मे मेघों की गोद खेलती गाज
सप्त रंगी इन्दृ धनुषी छठा खोलती मोहब्बत के राज
मेघों की गर्जन से उठते सप्तसुर
डरके दिल से लग जाती पृियतम
मिटती दिलों की दुरियाँ महकती कायनात
महबूब की पायलियाँ की तान

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव