क्वार के पूनम की शबनमी रात
छिटकती चाँदनी में
मादक शबनमी मोतियों की सौगात
अम्बर में चाँद आया
लेके असंख्य तारों की बारात
मुस्कुराई चाँदनी देख अम्बर में चँद
खिली खिली सी चाँदनी
ज्यों वसुन्धरा ने ओढी
चाँद तारों से सजी से सजी चुनरियाँ आज
चँदा से सतत हो रही शबनमी मोतियों की बरसात
चकवा चकवी के वियोग की
एक और दु:ख भरी रात
महबूबे मोहब्बत का रंगीन साथ
रूखसार के नूर से फबती वसुन्धरा
और पारिजात ने महकाई वसुन्धरा
क्वार के घनेरे मे मेघों की गोद खेलती गाज
सप्त रंगी इन्दृ धनुषी छठा खोलती मोहब्बत के राज
मेघों की गर्जन से उठते सप्तसुर
डरके दिल से लग जाती पृियतम
मिटती दिलों की दुरियाँ महकती कायनात
महबूब की पायलियाँ की तान
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 19 September 2016
क्वार की मदभरी चाँदनी रात
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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