Monday, 26 September 2016

आशियाना ए दिल

आइना ए दिल में
उनका दीदार करता हूँ
अपनी जिन्दगी से ज्यादा
एतबार करता हूँ

हरेक पल तनहाईयों में
उन्हीं का इन्तजार करता हूँ
वो मोहब्बत है मेरी
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा दिल
आशियाना ए मेरे महबूब
जब ख्वाहिश होती है
दीदार करता हूँ

पलक झपकते
ख्वाबगाह में आती है वो
दिली चाहत है मेरी
जिन्दगी से ज्यादा एतबार करता हूँ

अफसाना ए मोहब्बत
हरेक अल्फाज उनका
उनकी मोहब्बत की महक
हवाओं से स्वीकृत यार करता हूँ

तनहाईयों में
उनकी यादों का सहारा है
इनकी हरेक पल उपस्थिती
दिल से स्वीकार करता हूँ

मेरा मोहब्बत
मेरी सनम
आरजुये जिन्दगी
दिली एतबार करता हूँ

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

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