Wednesday, 28 September 2016

आरजुये दिल

ख्वाहिश महबूब
ख्वाबगाह की कशिश
तनहाईयों का आलम
तेरी महकती यादों का मंजर
दिली उपवन के शामियाने में
तुम्हारी मेहकती साँसों की
सुखद अनुभूति
निशा का निखरता यौवन
दिली आरजू महबूब की शबनमी मोहब्बत

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव