Wednesday, 28 September 2016

मुकद्दर

हाथों की चंद लकीरों में
लिख दिया रब ने
मुकद्दर जिन्दगी हमारी
जिन्दगी का एतबार
जिन्दगी का ठहराव
आशियाना ए मोहब्बत
दिल की किताब
सब कुछ तो समाहित है
इन चंद लकीरों में
कुछ लकीरों में
माथे की लकीर
हाथों की लकीर
गृह नक्छत्र और तारे
ज्योतिष घुमादेते गृहों को
चंद सिक्कों में
और बना देते है
सुगम जिन्दगी का मार्ग
चेन मोहब्बत करार एतबार
जिन्दगी की आवश्यकता
मेरे यार मेरे महबूब
मेरे एतबार
दिल ख्वाहिश
आरजुये जिन्दगी
दिल का करार
दिलों में कुछ लकीरे
धडकन बढती
कभी कभी जोरोसे
इन धडकनों में बसी
मेरी मोहब्बत
मेरी महबूब
मेरा प्यार
चंद लकीरों में बसी मेरी मोहब्बत
मेरी जिन्दगी मेरा एतबार

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