हाथों की चंद लकीरों में
लिख दिया रब ने
मुकद्दर जिन्दगी हमारी
जिन्दगी का एतबार
जिन्दगी का ठहराव
आशियाना ए मोहब्बत
दिल की किताब
सब कुछ तो समाहित है
इन चंद लकीरों में
कुछ लकीरों में
माथे की लकीर
हाथों की लकीर
गृह नक्छत्र और तारे
ज्योतिष घुमादेते गृहों को
चंद सिक्कों में
और बना देते है
सुगम जिन्दगी का मार्ग
चेन मोहब्बत करार एतबार
जिन्दगी की आवश्यकता
मेरे यार मेरे महबूब
मेरे एतबार
दिल ख्वाहिश
आरजुये जिन्दगी
दिल का करार
दिलों में कुछ लकीरे
धडकन बढती
कभी कभी जोरोसे
इन धडकनों में बसी
मेरी मोहब्बत
मेरी महबूब
मेरा प्यार
चंद लकीरों में बसी मेरी मोहब्बत
मेरी जिन्दगी मेरा एतबार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 28 September 2016
मुकद्दर
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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