Wednesday, 7 September 2016

३५७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

नित मेरी प्यास बुझाती लबो से पिला मादक हाला रूपसी बाला
मन मस्तिष्क मचलता नित आने को मेरी आधुनिक मधुशाला
कदम खुद बी खुद ठिठकते अंजान डगर राह ढूंढते मेरी मधुशाला
कृतक सदियों से पुजारी दिव्य अनुपम सागरमय अमृतसम हाला


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव