पोर पोर खिल उठा
कुमुदनी की मानिंद
पूनम की चाँदनी रात
शबनमी मोतियों ने
जब हुस्ने यार का स्पर्श किया
निखर उठा तन मन
मन उठी कायनात
मेरे यार की
मादक महक से
लम्हा लम्हा महकती फिजा
शबनमी मोतियों की बूँद
हरिक चादर पे हीरे लगे ज्यों
पलकों के आशियाने में
सँवरता हुस्न यार
हा यही प्यार है
बस यही प्यार है
पलकों से डगर बुहारी
दिल का आशियाना
खुबसूरत और लाजवाब
मेरे महबूब मेरे सनम
यही मोहब्बत है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 7 September 2016
मेरे महबूब
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
-
रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
No comments:
Post a Comment