Sunday, 30 October 2016

साँवरिया - ३

तेरी मोहब्बत में सारा जहाँ भुलाया हमने साँवरिया
तू साहिल है समाँ ले मचलती मौंजों को अपनी बाहों में
कायनात के जर्रा जर्रा तेरे नूर से रौशन है साँवरिया
ऩजरे इनायत फर्मा रौशन मेरी जिन्दगी हो जाये तेरी मोहब्बत से साँवरिया

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव