Sunday, 30 October 2016

साँवरिया

साँवरिया की याद बहुत आती है जानलों
अपने साँवरिया को दिल से अपना मान लो
जर्रे जर्रे में मेरे साँवरिया का नूर समाया है
बडी लगन से मेरे साँवरिया ने कायनात बनाया है
महकाया है फिजा को साँवरिया ने अपनी महक से
चहकाया है खगों को साँवरिया ने अपनी खनक से
सजाया है तारों सें वसुन्धरा को साँवरिया ने
चंदा की चाँदनी से शीतल वसुन्धरा किया मेरे कन्हाई ने
जर्रा जर्रा थिरकता है साँवरिया बाँसुरी की तान पे
दिल झूम उठता है महक करूणा निधान से
साँवरिया को याद कर शुकूनों करार दिल को आता है
कन्हाई की मोहब्बत के नग्में गाकर करार दिल को आता है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव