साँवरिया की याद बहुत आती है जानलों
अपने साँवरिया को दिल से अपना मान लो
जर्रे जर्रे में मेरे साँवरिया का नूर समाया है
बडी लगन से मेरे साँवरिया ने कायनात बनाया है
महकाया है फिजा को साँवरिया ने अपनी महक से
चहकाया है खगों को साँवरिया ने अपनी खनक से
सजाया है तारों सें वसुन्धरा को साँवरिया ने
चंदा की चाँदनी से शीतल वसुन्धरा किया मेरे कन्हाई ने
जर्रा जर्रा थिरकता है साँवरिया बाँसुरी की तान पे
दिल झूम उठता है महक करूणा निधान से
साँवरिया को याद कर शुकूनों करार दिल को आता है
कन्हाई की मोहब्बत के नग्में गाकर करार दिल को आता है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 30 October 2016
साँवरिया
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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