सरहदें पहली मोहब्बत मेरी
मै सरहदों का रखवाला
अनुशासन में गठा बडा मैं
मादरे वतन का रखवाला
मैं वतन का अदना सा सेवक
हाथ में बंदूक निराली
मादरे वतन की रक्छा की कसम मैंने खाई
जाँ देकर भी मै अपना फर्ज निभाउँगा
मातृ भूमि रक्छा की खातिर मृत्यु को महबूबा बनाउँगा
कभी न झुकने दूँगा तिरंगा उसकी शान बनाउँगा
मातृभूमि का अदना सा सैनिक अपना कर्तव्य निभाउँगा
मेरा धर्म मातृभूमि है मेरा कर्म मातृभूमि है
अपने कर्म धर्म हिल बलि बलि जाउँगा
अपनी माँ का नन्हा बालक माके दूध का कर्ज निभाउँगा
आतंकवाद है दुश्मन मातृभूमि का जड से उसे मिटाउँगा
काश्मीर की केसर सम माटी का माथे तिलक लगाउँगा
काश्मीर मस्तक है वतन कभी न झुकने पायेगा
भारत मा का लाल मनोहर यादव जाँ की बाजी लगाकर अपना कर्तव्य निभाउँगा
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 6 October 2016
अदना सा सैनिक
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
-
रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
No comments:
Post a Comment