Thursday, 6 October 2016

अदना सा सैनिक

सरहदें पहली मोहब्बत मेरी
मै सरहदों का रखवाला
अनुशासन में गठा बडा मैं
मादरे वतन का रखवाला
मैं वतन का अदना सा सेवक
हाथ में बंदूक निराली
मादरे वतन की रक्छा की कसम मैंने खाई
जाँ देकर भी मै अपना फर्ज निभाउँगा
मातृ भूमि रक्छा की खातिर मृत्यु को महबूबा बनाउँगा
कभी न झुकने दूँगा तिरंगा उसकी शान बनाउँगा
मातृभूमि का अदना सा सैनिक अपना कर्तव्य निभाउँगा
मेरा धर्म मातृभूमि है मेरा कर्म मातृभूमि है
अपने कर्म धर्म हिल बलि बलि जाउँगा
अपनी माँ का नन्हा बालक माके दूध का कर्ज निभाउँगा
आतंकवाद है दुश्मन मातृभूमि का जड से उसे मिटाउँगा
काश्मीर की केसर सम माटी का माथे तिलक लगाउँगा
काश्मीर मस्तक है वतन कभी न झुकने पायेगा
भारत मा का लाल मनोहर यादव जाँ की बाजी लगाकर अपना कर्तव्य निभाउँगा

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव