तलाश है उन अनमोल मोहब्बत भरे लम्हों की
जो तुम्हारें साथ बिताने की दिली ख्वाहिश है मेरे महबूब
रब से गुजारिश है या रब वो लम्हें लिख दे मुकद्दर में मेरे
हवा में उडू
दीदारे यार करू
बाहों में भरके जी भर के मोहब्बत का इझहार करू
साज भी मेरे ही हो
आवाज भी मेरी ही हो
दिल मेरा हो धडकन मेरे यार की
जिस्म मेरा हो रूह मेरे प्यार की
एतबार की इन्तहा न हो न इन्तजार की
ख्वाबगाह मे तुझसे मुलाकात हो
बरखा हो तेरे प्यार की
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 9 October 2016
लम्हें प्यार के
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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