आदमियत की ख्वाहिश है या रब
दिली तमन्ना और एतबार है तुझपर
रहमों करम की इल्तजा है या परवरदिगार
तेरी रहमत बरसे तेरे पाक बंदों पे
हरेक आरजू हो पूरी मेरे महबूब हमारी
तुझसे बँधी है डोर जिन्दगी की
तेरी मोहब्बत की आरजू हमारी
दिल आशियाना हो गुजारिश है तुझसे
बनके रूह रहना मेहरबाँ हमारे
चाँद सूरज तेरे दो नैना कुछ छुपा नही या रब तुझसे
मेरी मोहब्बत भी तू दिली ख्वाहिश भी तूही
मेरी हर खुशी मेरी जिन्दगी सनम तूही
नहीं ख्वाहिश जमाने भर की दौलत की या रब
मेरी रूह मेरी जमाने भर की दौलत बस तूही
महकती है कायनात बस तेरी महक से
तेरी नेत्र खुलने से होता दिवस या रब
मेरा नाता रिश्ता मेरा प्यार मेरा यार तूही खुदावन
बस तेरी आरजू तेरी मोहब्बत है प्यारी
इन्सानियत और नेकी की बरकत या रब मुझे दे
तेरी मोहब्बत में हो साँझ और हर सबेरा
आँखे खोलू तो तेरा दीदार हो पलक झपकू तुझसे प्यार हो
जब मौत आये तो तू साथ हो तेरा एहसास हो
आदमियत लिये मनोहर ले रूखसत परवाज हो
तेरी मुरलियाँ की तान गुँजे मेरे कानों में सदा यही आखिरी आरजू है हमारी
या मेरे परवरदिगार तेरी मोहनी मूरत लगती है प्यारी
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment