हिन्दुस्तानी कहता मै खुद को
वतन हिन्दुस्तान हमारा है
वतन की रक्था हित जाँ की बाजी लगाने से नही हिचकता
हिन्दुस्तान से वजूद हमारा है
स्वयं हित हमने हिन्दू समाज अनेकानेक वर्णो में बाँट दिया
कोई मनुवादी कोई अंबेडकरवादी कोई गाँधीवादी कोई नेहरूवादी कहलाते है
अवसरवादियों की देन देखिये हिन्दू आज टुकडे टुकडे नजर आता है
१७ बार मोहम्मद गोरी को हराने वाला चौहान राजपूत कहलाता है
हम चारो संतान मनू की बृाह्मण छत्रिय वेश्य शुदृ कहलाते है
जातिय नही कर्मो के मुताबिक विश्व में जाने जाते हैं
हम चारों के चारों भाई जहाँ में हिन्दुस्तानी के नाम से जाने जाते हैं
समता और ममता के चौबारे अपना अपना फर्ज कर्तव्य निभाते है
हमें न तुम बाँटों जग वालों एक हमें तुम रहने दो भारत माता के चौबारे वन्दे मातरम कहने दो
अपनी एकता के बल पर हम सारे जहाँ को कदमों में झुकायेगें
आतंकवाद की क्यारी पाकिस्तान की ईंट से ईंट कंधे से कंधा मिलाके आज बजायेगें
मनोहर यादव
अमृत सागर
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