Friday, 7 October 2016

अवसरवाद

हिन्दुस्तानी कहता मै खुद को
वतन हिन्दुस्तान हमारा है
वतन की रक्था हित जाँ की बाजी लगाने से नही हिचकता
हिन्दुस्तान से वजूद हमारा है
स्वयं हित हमने हिन्दू समाज अनेकानेक वर्णो में बाँट दिया
कोई मनुवादी कोई अंबेडकरवादी कोई गाँधीवादी कोई नेहरूवादी कहलाते है
अवसरवादियों की देन देखिये हिन्दू आज टुकडे टुकडे नजर आता है
१७ बार मोहम्मद गोरी को हराने वाला चौहान राजपूत कहलाता है
हम चारो संतान मनू की बृाह्मण छत्रिय वेश्य शुदृ कहलाते है
जातिय नही कर्मो के मुताबिक विश्व में जाने जाते हैं
हम चारों के चारों भाई जहाँ में हिन्दुस्तानी के नाम से जाने जाते हैं
समता और ममता के चौबारे अपना अपना फर्ज कर्तव्य निभाते है
हमें न तुम बाँटों जग वालों एक हमें तुम रहने दो भारत माता के चौबारे वन्दे मातरम कहने दो
अपनी एकता के बल पर हम सारे जहाँ को कदमों में झुकायेगें
आतंकवाद की क्यारी पाकिस्तान की ईंट से ईंट कंधे से कंधा मिलाके आज बजायेगें

मनोहर यादव
अमृत सागर

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव