Sunday, 2 October 2016

मोहब्बत

मेरे नसीब में यारी है तेरी
दीदारे यार नहीं
इसके माइने ये नहीं ए दोस्त
हमें तेरी यारी पे एतबार नहीं
बहुत खुबसूरत और हँसी है महबूब
दूर है तो क्या हमें उससे प्यार नहीं

मोहब्बत भी एतबार भी है
दोस्ती का हक है अधिकार भी है
तेरी दोस्ती पे है नाज मुझे
तेरी यारी पे दिली एतबार भी है

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव