फिर आई शाम सुहानी सावन की
घिर आई शाम सुहानी सावन की
साँवन की मन भावन की पृियतम के आवन की
साँवन की फुहारों के बीत मचलते अरमाँ दिल के पृियतम संग पावन की
घिर आई फिर आई शाम सुहानी सावन की
मोहब्बत के मचलते अरमाँ दिल के
महबूब का संग अज फिर पावन की
घिर आई फिर आई सुहानी शाम सावन की
पृियतम प्यारे के ढिंग आवन की
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