मोहब्बत में ठोकर खाई हमने
जिन्दगी के मायने ही बदल गये
दिल में समाहित दर्द
अल्फाजों में ढलके सप्त सुरों में बदल गये
जुनूने जिन्दगी तनहाईयों में खो गया
मोहब्बत भरा आईना जो देखा दिल जाने कहा खो गया
गर गुनाह है मोहब्बत करना
गुनाहगार हूँ मैं
मोहब्बत में हरेक सजा का हकदार हूँ मैं
पृियतम की मोहब्बत की चाहत में
जिन्दगी का तो रंग ही बदल गया
जवानी खो गई लिहाफ में
बुढापा सवार हो गया
कबृ में पैर लटकायें कतृक खो गया
मोहब्बत की चाहत में यौवन खो गया
दर्द जब हद से बढा लफ्जों में ढलके गीतों गजल हो गया
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