निशा का तिमिर हरण किया
रवि की पावन किरणों ने
जिन्दगी जहाँ रौशन हुई
रौशन हुई कायनातों फिजा
मन के आँगन का तिमिर हरण हुआ
दिव्य ग्यान की पावन वाणी से
तनहाईयों से मन मुक्त हुआ
जब दीदारे यार हुआ पृभात बेला में
महबूबे मोहब्बत की डगर महक गई
बसंती पावन झोकों से
मन मस्तिष्क पसन्न हुआ
जब पाया साथ तेरा
संध्या की पावन बेला आई
हुई बिदाई रवि किरणो की
निशा ने दामन थाम संध्या को साथ लिया
फिर वही तनहाईयाँ
फिर चंदा का पावन साथ
मोहब्बत भरी जिन्दगी महकी
जब हुई पूऩम की चाँदनी से मुलाकात
शबनमी मोतियों से वसुन्धरा जगमगाई जब हुई चाँदनी से मुलाकात
महबूबे मोहब्बत का दीदार हुई दिल से दिल की बात
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 27 October 2016
निशा
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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