Thursday, 27 October 2016

वफा

वफा मेेैने की सदा जफा मैने पाई
पत्थर से दिल लगाया, दिल पे चोट खाई

वफा की राह चलते चलते जिन्दगी गुजर गई
वफा की चाहत मे जिन्दगी की शाम ढल गई

उम्मीदे वफा मे जिये जा रहा हूँ मै
गरल मोहब्बते जिन्दगी का पिये जा रहा हूँ मैं

वफा की आरजू है जिन्दगी के सफर में
गर ना भी मिली सफर बदस्तूर जारी है

बे वफा से वफा की उम्मीद न कर दिलें नादाँ
जो उसके पास है ही नहीं कहाँ से तूझे देगी बेवफा

तुम्हारी वफा लगती है बहुत प्यारी
उम्मीदे वफा आरजुये जिन्दगी है हमारी

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव