जिस्म की पाकीजगी नहीं
मोहब्बत में मसरूफ रूह का दीदार करता हूँ
दिल रूह जानों जिगर से
मोहब्बत मेरे सरकार करता हूँ
आदमियत का तकाजा है
इन्सानियत पे एतबार करता हूँ
दिल से सोचता हूँ
मोहब्बत भरे दिल से
मदहोश नही
होशों हवास मे स्वीकार करता हूँ
इबादते हुस्न तस्लीम करता हूँ
आशियाना ए दिल के
इबादत खाने में
महऱूज है
तस्वीर हुस्न यार की
गेसुओं का गजरा बनू
यही ख्वाहिश
मेरे महबूब है मेरी
तेरे जिस्म जहन में
खुशबू से मेरी
महके रूह कायनातों फिजा
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 22 October 2016
मोहब्बतनामा
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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