Friday, 21 October 2016

मादरे वतन

मेरे मुल्क में सदियों से बह रही अमन की गंगधार है
मुझे अपने मुल्क की सौंधी माटी से बेपनाह प्यार है
अब तक बहुत सहा हमने अब और न हम सहेंगें
जिस किसी गद्दारे वतन ने आँख मादरे वतन पे उठाई उसे जमीं दरोंज करके ही दम लेंगें
हमने थाम लिया है तिरंगा आज अपने हाथ में
दुश्मन की चूले हिला देगें एक ही परवाज में
अब पूरी सिन्धू हिन्दुस्तान में बहेगी
अब हमारे मुल्क का जर्रा जर्रा नमों की महिमा बखान करेगा
सफेद हरे रंग के उपर केशरिया रंग स्थान पायेगा
मेरे मुल्क मेरे हिन्दुस्तान मे फिर से तिरंगा लहरायेगा
बच्चा बच्चा मुल्क का वंदे मातरम आज गायेगा
एक बार फिर से तिरंगा माउण्ट एवरेष्ट पर लहरायेगा
सारा विश्व जन गण मण जय गान करेगा बहती पूर्वईया में मादरे वतन का बखान करेगा

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव