तुमने हरेक अल्फाजों को सलीके से सरोयें
शक्ति सम तुम पावन शेफाली सम मनभावन
शक्ति हो तुम भक्ति हो तुम पवित्र पावन
कोई क्या तुम्हें दाग दार बनायेगा
भागीरथी में लगाके डुबकी पापों से मुक्ति पायेगा
जनम जनम के पापों से मुक्ति पायेगा जो तेरे कदमों में शीश झुकायेगा
सीता भी तुही तूही सती और सावित्री
कोई क्या तेरे दामन पे दाग लगायेगा
माँ अम्बे शक्ति तूही भक्ति तूही तेरे चरणोँ मे जन्नत पायेगा
मात तुमसे ये जहाँ ये कायनात सारी है
गंगा यमुना सरस्वती कृष्णा कावेरीं मुक्ति दायिनी हमारी है
तुमसे ये दुनियाँ ये सारा जहाँ है तुमसे वसुन्धरा आसमाँ है
मनोहर यादव
"अमृत सागर"
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