Wednesday, 12 October 2016

शक्ति की भक्ति

तुमने हरेक अल्फाजों को सलीके से सरोयें
शक्ति सम तुम पावन शेफाली सम मनभावन
शक्ति हो तुम भक्ति हो तुम पवित्र पावन
कोई क्या तुम्हें दाग दार बनायेगा
भागीरथी में लगाके डुबकी पापों से मुक्ति पायेगा
जनम जनम के पापों से मुक्ति पायेगा जो तेरे कदमों में शीश झुकायेगा
सीता भी तुही तूही सती और सावित्री
कोई क्या तेरे दामन पे दाग लगायेगा
माँ अम्बे शक्ति तूही भक्ति तूही तेरे चरणोँ मे जन्नत पायेगा
मात तुमसे ये जहाँ ये कायनात सारी है
गंगा यमुना सरस्वती कृष्णा कावेरीं मुक्ति दायिनी हमारी है
तुमसे ये दुनियाँ ये सारा जहाँ है तुमसे वसुन्धरा आसमाँ है

मनोहर यादव
"अमृत सागर"

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव