Wednesday, 12 October 2016

मोहब्बत जिन्दगी है

मोहब्बत जहर है
जहर है मोहब्बत
एक बार जो चख लेता है
जी जी मरता है मोहब्बत में
मर मरके जीता है मोहब्बत में
बुजुर्गो ने फर्माया है
कभी इष्क न करियों यार
ये वो फल है
जिसने खाया हुआ बेकार
जिसने न खाया वो बेचारा
रहा तडपता लाचार
हम तुम्हारी मोहब्बत के मारे है सनम
सदियों से कर रहे तुम्हारा इन्तजार

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव