Monday, 3 October 2016

औरत

पिंक मूवी से पुन: समाज की द्वी मुखी नीती परिलक्छित होती है
औरत होना कोई पाप नहीं है
औरत होना कोई अभिषाप नहीं है
औरत सृष्टी का द्वार है
औरत से कायनात और संसार है
आखिर क्यों औरत पे सदियों से कानून थोपता आया है जहाँ
आखिर क्यों औरतों के जीरो फीगर की ताकीद करता है जहाँ
औरत आज बेबस लाचार और बेचारी नहीं है
औरत होना वर्तमान परिपेक्छ मे कोई अभिषाप नहीं है
औरत से ये जहाँ ये कायनात है
औरत से एक और अग्नी परीक्छा की दरकार नहीं है
है कोई इस जहाँ में जिसे औरत से प्यार नहीं है
आज लक्छमण रेखा से बहुत आगे बढ गई है औरत
वर्तमान में हरेक छेत्र की जरूरत है औरत
धरा से अम्बर तक आज औरत का अधिकार है
सदियों से शक्ति स्वरूपा हैं औरत इस बात से इन्कार नही है
शक्ति की बदौलत देव और इन्सान की है शोहरत
आज की औरत अंधेरों से आजाद है
आज की औरत रब की महकती फरियाद है
आज औरत की महक से महकती है ये कायनात
आज औरत के नूरे रूखसार से रौशन है ये कायनात
मा,बहन बेटियाँ के रूप में धर्म निभाती है औरत
बीबी बनके पति का साथ निभाती है औरत
संसार की सभ्यता को आगे बढाती है औरत
आदमी की सफलता का पर्याय कहलाती है औरत
हरेक पुरूष की सफस़लता के पीछे औरत का हाथ होता है
हरेक औरत की सफलता में बाप , भाई , बेटों और पति का साथ होता है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव